ग्वालियर, खजुराहो और दतिया में पारा 2 डिग्री पर, कई क्षेत्र शीतलहर की चपेट में

भोपाल। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में जबरदस्त बर्फबारी के साथ ही हवा का रुख उत्तरी होने से मैदानी इलाके कड़ाके की ठंड की चपेट में आ गए हैं। संक्रांंति के अवसर पर ठंड के यू टर्न से सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात ग्वालियर, दतिया, खजुराहो और नौगांव में पारा लुढ़ककर 2 डिग्री से. पर पहुंच गया। मौसम केंद्र की तरफ से छतरपुर, पन्ना, रीवा, सतना, सिंगरौली, उमरिया, बालाघाट, ग्वालियर और दतिया में शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है।

अप्रत्याशित बदलाव के कारण

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक उत्तर भारत क्षेत्र में एक के बाद एक आ रहे पश्चिमी विक्षोभ के असर से बर्फबारी का दौर जारी है। अफगानिस्तान व देश के उत्तरी इलाके में फ्रीजिंग स्तर (ऊंचाई का वह स्तर जहां वातावरण का तापमान शून्य डिसे हो) 3.1 किमी रह गया है। ऐसे में उत्तरी क्षेत्र में पानी बरसने के स्थान पर सीधे बर्फवारी हो रही है। वहां से आने वाली तेज रफ्तार (4 से 8 किमी प्रतिघंटा) ठंडी हवाओं के कारण वातावरण तेजी के साथ ठंडा हो रहा है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी उदय सरवटे ने बताया कि अभी दो दिन तक ठंड से राहत की उम्मीद नहीं है। इसके बाद रात के तापमान में धीरे-धीरे इजाफा होगा। हालांकि ठंड जनवरी के अंत तक बरकरार रहेगी।

तापमान 

पिछले 24 घंटों के दौरान ग्वालियर में 7.6 डिसे की अप्रत्याशित रिकॉर्ड गिरावट के साथ न्यूनतम तापमान महज 2.4 डिसे पर आ गया। मौसम कार्यालय में 2011 से लेकर अब तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी माह में अब से पहले 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में कभी भी इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई है। मौसम विभाग के अनुसार पारे में 24 घंटों के दौरान इतनी अधिक गिरावट आना अप्रत्याशित है। अब से पहले 19 जनवरी 2013 में न्यूनतम तापमान 15.3 डिसे गिरकर 8.2 डिसे रह गया था। खास बात यह भी थी कि 2013 में 7.1 डिसे की यह गिरावट उस स्थिति में आई थी जब न्यूनतम तापमान 18 जनवरी को सामान्य से 8.8 डिसे अधिक था। गत दिवस न्यूनतम तापमान सामान्य से महज 3.2 डिसे ही अधिक था। मौसम कार्यालय के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान ठंड से राहत मिलने के आसार कम हैं। 24 जनवरी 1954 को ग्वालियर में पारा -1.1 डिसे दर्ज किया गया था। 1991, 2003, 2013 में पारा शहरी क्षेत्र में 1.1 डिसे दर्ज हुआ है।

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